चाची बबिता की गांड़ मारी

चाचि बबिता को दोपहर मे हि चोद ड़ाला, उनकी भुख फ़िल्हाल शांत नही पड़ी थी जबकि मै चाचि के साथ दुबारा मस्ती करने की सोच रहा था ! शाम को चाचा और उनके बच्चे भी घर आ गये और मै बाज़ार कि ओर घुमने चला गया, आज रात को चाचि को कैसे चोदा जाये यही सोच रहा था और फ़िर घर वापस आ गया ! रात 9:30 बजे तक चाचा और बच्चे खाना खाकर सोने चले गये और मै चाचि को अकेले मे पाकर बोला….. “चाचि रात को आओगी क्या

(चाचि) कोसिस करुंग़ी तुम खाना नही खाओगे

(राहुल) मै छत पर जा रहा हु बियर पीने के लिये तुम चाचा के सोते हि मेरे पास आ जाना

(चाचि) देखो वो कब सोते है. ” और फ़िर चाचि किचन की ओर गयी, एक ग्लास दुध लेकर आई तो मेरा दिमाग ठनका, अपने कमरे मे जाकर निंद की गोली अपने बैग से निकाला और दुध के ग्लास मे ड़ाल दिया ! चाचि दुध का ग्लास लेकर अपने बेड़रूम गयी तो मै बियर कि बोतल लेकर छत पर चला गया !

मार्च का महिना था तो गरमी अभी शुरु हुई थी और मै बियर पिकर अपने बदन को थोड़ा ठंड़ा करना चाह्ता था, छत पर बैठ्कर एक बोतल बियर पी चुका था तो चाचि वहा पहुंची और मै जमीन पर ही एक बेड़ लगाए बैठा था ! चाचि काले रंग़ के गाउन मे सुंदर और सेक्सी दिख रही थी, वो बेशर्म औरत की तरह मेरे गोद मे बैठकर मुझे चुमने लगी, मेरे गोद मे अपने दोनो पैर दो दिशा मे किये मेरे कमर से लपेटे बैठी हुई थी और मेरे ओंठ और गाल को चुम्बन देने लगी ! बबिता का दोनो स्तन मेरे छाती से चिपक रहा था तो मै उसको कसकर पकड़े उसके ओंठ को चुसने लगा, चाचि कामुक होकर अपना जिभ मेरे मुह्न मे ड़ाल दी और उनका जिभ चुसता हुआ मै उनके पिठ को सहला रहा था ! चाचि के गाउन को उपर करने कि कोशिश करने लगा तो वो मेरे गोद से अपने चुत्तर को थोड़ा उपर करके खुद हि गाउन को कमर तक कर दी !

बबिता के जिभ को मुह्न से निकाल उसके गाउन को गले से बाहर कर दिया और चाचि ब्रा और पेण्टी मे मस्त माल दिख रही थी ! उनकी भारी-2 चुची बाहर आने को बेताब थी तो मै बबिता को बेड़ पर सुला दिया और उनके उपर औंध कर ब्रा को खोल दिया, उनके स्तन को जोर-2 से मसलने लगा तो वो सिसक रही थी, फ़िर वो अपने चुचि को खुद ही पकड़कर मेरी मुह्न मे घुसा दी, उनके आधे से अधिक चुचि को चुसता हुआ दुसरे स्तन को मसल रहा था ! चाचि बेड़ पर तड़प रही थी और चिंख पड़ी…… “ऊह्ह उम्मम्म राहुल मेरी बुर मे किड़े रेंग़ रहे है आह्ह दुसरी चुचि चुसकर बुर चोदो ना

(राहुल) अभी बुर चाटुंग़ा तुम मेरा लंड़ चुसोगी फ़िर होगी चुदाई. ” और चाचि के दुसरे स्तन को चुभलाता हुआ मस्त हो रहा था ! चाचि के चिकने जिस्म पर चुम्बन देता हुआ उनके पेंटी का हूक खोला और चाचि अपने दोनो जङ्हा को फ़लकाए बुर चमका रही थी, उनके मोटे-2 जङ्हा को चुमता हुआ बुर को सहलाने लगा और वो चुदने को आतुर थी ! मै चाचि को बेड़ पर खड़ा होने बोला और फ़िर उनके दोनो जङ्हा के बिच मे अपना मुह्न लगा दिया, बुर पर चुंबन देने लगा और उनके मस्त गांड़ को सहला रहा था, वो रांड़ बुर को फ़ल्का दी, फ़िर मेरा जिभ उसकी बुर मे घुसने लगा, बुर को चाटता हुआ मस्त था तो बबिता मेरे बाल को कसकर पकड़े मेरी मुह्न को अपने बुर की ओर धंसा रही थी ! मै चाचि की चुत को अपने जिभ से 5-7 मिनट तक चोदा और फ़िर चाचि बिस्तर पर बैठ गयी !

बबिता मेरे बरमुड़ा को खोलने लगी और मेरे मुसललंड़ को थामकर बोली……. “एक बार तेरे इस मुसल लंड़ से गांड़ मरवाना चाह्ती हु

(राहुल) जरुर अभी मै निचे से आता हु. ” मै बरमुड़ा पहनकर निचे गया और एक तकिया, मखखन कि एक टिकिया साथ मे एक बियर कि बोतल लेकर आया ! चाचि बेड़ पर लेटी हुई थी तो उनके मांसल चुत्तर के निचे तकिया ड़ालकर उनके गांड़ के मुह्नाने को चुमने लगा, साथ हि मुहाने को फ़लकाकर अपने जिभ से चाट्ने लगा, वो सिसक रही थी और मै उनके गांड़ चाटते हुए बुर मे एक साथ दो उंग़ली करने लगा ! चाची की चुत मे उंग़ली और गांड़ के मुहाने मे जिभ उनको गरम कर रहा था, अब मै उनके गांड़ के मुहाने पर मख्खन रगड़्ने लगा, बबिता को पट लिटाकर उनके चुत्तर पर चुंबन देने लगा तो वो “आह्ह ऊम्मम्म ऊह्हह “करके सिसक रही थी ! अब उनको बेड़ पर कुतिया की तरह कर दिया और उनके भारी भरकम चुत्तर के सामने बैठ्कर अपना लंड़ उनके गांड़ मे घुसाने लगा, 1/2 लंड़ घुसते हि लग रहा था मानो उसकी गांड़ चरक जायेगी, तभि मै उनके कमर को कसकर पकड़े अपने मुसललंड़ को उसके गांड़ मे पेलने लगा और वो चिंख पड़ी….. “ऊऊउईईइ बाप रे कितना मोटा लंड़ है तेरा, गांड़ फ़ाड़ कर ही रहोगे. ” और मै जोर से लंड़ का झट्का गांड़ मे दे दिया, मेरा 7-8 इंच लम्बा लंड़ उसकी गांड़ मे था और मै पुरे गति से उसकी गांड़ मारने लगा, चाची को दर्द भी था तो मजा भी आ रहा था और मै उनके मांसल गांड़ मारते हुए उनके सिने से लटकते चुचि को मसलने लगा ! छत पर हमदोनो मजे कर रहे थे और वो अपने चुत्तर को हिला ड़ुलाकर गांड़ मरवा रही थी, 5-7 मिनट मे हि गांड़ मे आग लग चुकि थी और वो चिखने लगी……. “ऊइह्हह ऊम्मम्मम राहुल गांड़ मे आग लगी हुई है बुझा दो ना

(राहुल) इतनी जल्दी क्या है. ” और फ़िर मै उनके गांड़ से लंड़ निकाल लिया !

बबिता अब बिस्तर पर सो गयी तो उनके चुत्तर के निचे तकिया ड़ालकर मै उसकी बुर को निहारने लगा ! उनके गांड़ के मुहाने पर मख्खन लगाता हुआ थोड़ा सा अंदर भी घुसा दिया, फ़िर गांड़ मे उंग़ली करते हुए उसके गांड़ को मख्खन से चिकना और ठंड़ा करने लगा ! चाचि मुस्कुराते हुए बोली…… “राहुल तब तक बुर हि चोद ड़ालो. ” मै उनके दोनो जङ्हा के बिच अपना लंड़ पकड़े बैठा और उनकी चुत मे लंड़ पेलकर चुदाई करने लगा ! छत पर खुले वातावरण मे चाचि को चोद रहा था और उनके मांसल बदन पर सवार होकर चुदाई कर रहा था तो बबिता अपने ड़नलप समान चुत्तर को उपर निचे करने लगी और मै चाचि के ओंठ और गाल को चुम रहा था, वो अब…… “आह्हह ऊम्मम्मम ओह्हह्हह्ह राहुल और तेज चोदो ना बुर से पानी निकलने वाला है. ” फ़िर बबिता कि बुर रस से भर गयी तो मै कुत्ते कि तरह उसके बुर को जिभ से चाट्ने लगा ! चाची की ढीली चुत मे पुरा जिभ घुसाकर रस का स्वाद लेने लगा और फ़िर चाचि बेड़ पर कुत्तिया कि तरह हो गयी, उनके भारी भरकम चुत्तर के सामने मै घुटने के बल बैठा हुआ अपने लंड़ को पकड़ उनके गांड़ मे पेला और पुरा लंड़ घुसते हि जोर का झट्का गांड़ मे देने लगा ! चाचि की गांड़ मारते हुए उनके सिने से लटकते चुचि को मसलने लगा, वो अपने नितम्ब हिलाकर मजा दे रही थी, उनके रसिले गांड़ मे मेरा लंड़ तेजि से अंदर बाहर हो रहा था जबकि मै उनके झुलते स्तन को मसलकर मस्त हो रहा था ! लग्भग 15 मिनट तक चाचि के गांड़ को चोदा और फ़िर….. “आह्हह्ह मेरा रस निकला. ” बबिता कि गांड़ मे विर्य गिराकर शांत हो गया !

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Linga11

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