माया चाचि की चुदाई

मेरी मम्मी की सहेली माया और मेरे बिच जिस्मानी रिश्ते कई दफ़े बन चुके थे और मेरी मम्मी को हमदोनो के बिच के सम्बंध के बारे मे मालुम था ! माया चाचि मेरी मम्मी की तरह मौज मस्ती करने वाली औरत थी तो मेरी नज़र मे वो मेरे सामने दुने उम्र की औरत थी ! सच पुछा जाय तो 40 साल की औरत के साथ सम्भोग करने मे उतना आनंद नही है जितना की 20-25 साल की लड़्की के साथ, एक तो वैसी औरत की चुत काफ़ी ढीली होती है साथ मे उनके स्तन हो या चुत्तर….. उनका आकार बड़ा और बेड़ोल होता है लेकिन माया अपने शरीर को काफ़ी हद तक फ़िट रखी थी ! उम्र के हिसाब से उनकी चुची काफ़ी गठीली और चुत्तर गोल गुम्बदाकार और सेक्सी थे, आज सुबह जब उनका फ़ोन आया तभी मै कालेज के लिये निकला ही था……… “हेलो माया आंटी कैसी हो

(माया) तूम्हे मिलने की फ़ुर्सत तक नही

(राहुल) देल्ही गया था बोलिये तो अभी आ जाता हु

(माया) ठीक है आ जाओ और साथ मे दो बोट्ल बियर भी ले लेना. ”

मै बाजार मे रुककर बियर और सिगरेट खरीदा फ़िर माया चाचि के घर पहुंच गया, उनका मेन गेट खुला हुआ था तो मै बाईक को लाउन मे खड़ा किया और फ़िर दरवाजा के पास गया, पर्दा के किनारे से अंदर की ओर झांका और आवाज दिया……… “माया आंटी किधर है. ” थोड़ो देर बाद आवाज आई…… “बैठो राहुल मै आती हु. ” मै अंदर घुसकर बैठ्ने की जगह उनके बेड़ रूम की ओर चला गया और दरवाजा के पास खड़े होकर पर्दे के किनारे से अंदर झांका तो होश उड़ गये ! एक बड़े से दर्पन के सामने माया नग्न खड़ी थी और मै उनके नग्न चुत्तर और पीठ को देख रहा था, उनके अगले हिस्से का प्रतिबिम्ब दर्पन पर बन रहा था तो मुझे दर्पन मे उनकी बड़ी-2 चुचि और जङ्हा के दर्शन हो रहे थे ! मेरा लंड़ तो खम्बा हो चुका था तभी बेड़ पर पड़े साया को माया हाथ मे ले ली और फ़िर कमर से साया पहनकर अपने नग्न निचले भाग को ढ्क ली, मै तभी कमरे मे घुस गया और शायद उनको मेरी आहट का आभास हुआ और वो पिछे कि ओर मुड़ी तो मै चाचि को अपने बाहो मे भर लिया ! वो मेरे से लिपट्कर गर्दन चुम रही थी तो उसके नग्न स्तन मेरे सिने से दब रहे थे, मै तभी माया को बेड़ पर सुला दिया और अपना शर्ट उतार फ़ेंका, उनके बदन पर सवार होकर ओंठ और गाल चुमने लगा तो वो मेरे पीठ को सहलाने लगी ! माया तभी अपना जिभ मेरे मुह्न मे ड़ालकर मेरे गर्दन को थाम ली और मै माया के जिभ को चुसता हुआ मस्त था, कुछ देर तक जिभ चुसने के बाद मुझे याद आया की दरवाजा खुला हुआ है ! मै जाकर दरवाजा बंद कर दिया और फ़िर वापस आया तो माया ब्लाउज पहन रही थी, अब दोनो ड़ायनिंग़ रूम मे सोफ़ा पर बैठ गये तो वो दो ग्लास लेकर आई ! मेरे सामने वो झुककर ग्लास मे बियर ड़ाल रही थी तो मै सिगरेट को सुलगाया और फ़िर दोनो बियर पीने लगे, वो मेरे सामने वाले सोफ़ा पर बैठी हुई थी तो मै बियर की चुस्की लेता हुआ माया के बुब्स को घुर रहा था, चुचि के कुछ भाग दिख रहे थे तो उनकी ब्लाउज से चुचि बाहर निकल आएगी….. ऐसा मुझे लग रहा था, माया को बोला……. “क्या बात है ब्लाउज पहन ली जबकी उसे तो उतारना ही पड़ेगा

(माया अपने सिने पर से साड़ि हटाकर) लो देखो अभी ब्लाउज भी खोल ड़ालती हु

(राहुल) ओह चाचि रहने दिजिये ना मै खोलुंग़ा. ”

माया अपने ब्लाउज खोलकर स्तन को नग्न कर दी तो मै अपना जिंस खोलकर उनके सामने गया, वो मेरे लंड़ के उभार को चड़्ही पर से ही सहलाने लगी….. “खोल कर देखु कुछ मोटा हुआ है क्या. ” वो मेरे चड़्ही को उतार दी और मुसललंड़ को पकड़ कर सुपाड़ा को अपने चेहरे और ओंठ पर रगड़ने लगी, माया बिना देर किये मेरे लंड़ को मुह्न मे भर ली और चुसने लगी तो मुझे काफ़ी मजा आ रहा था ! वो कुछ देर तक लंड़ को चुसकर अपने मुह्न से बाहर की और फ़िर जिभ से लंड़ चाट्ने लगी, मेरा मुसल लंड़ पुरी तरह से चुदाई को तैयार था लेकिन मेरा मानना है की चुसे हुए लंड़ से चाटे हुए बुर को चोदने का मजा ही कुछ अलग है ! माया के मुह्न मे लंड़ था तो मै उसके बाल को कसकर थामे उसके मुह्न को ही लंड़ से चोदने लगा, मेरा सुपाड़ा माया के गले तक जाकर अटक जाती थी, 4-5 मिनट तक माया के मुह्न को लंड़ से चोदता रहा और फ़िर वो मेरे लंड़ को मुह्न से बाहर निकाल दी ! मै बाथरूम जाकर पिसाब किया और फ़िर दोनो सोफ़ा पर बैठ्कर बियर पीने लगे लेकिन मै माया के साया को खोलकर नग्न कर दिया, दोनो नग्न अवस्था मे सोफ़ा पर थे तो बियर पीते हुए मै उसके स्तन को मसलने लगा…….. “माया रानी एक बात बता

(माया मेरे लंड़ को सहलाने लगी) पुछ ना जानु

(राहुल) तुझे किस काम मे मजा आता है समझी मेरा सवाल

(माया) जरुर काम मे तो अब अगर गांड़ ही चोदो तो सबसे अधिक मजा आयेगा. ”

हमदोनो दो बोट्ल बियर गटक चुके थे और मै अब सोफ़ा के निचे घुट्ने के बल हो गया फ़िर माया को सोफ़ा के किनारे बैठ्ने को बोला, वो दोनो पैर दो दिशा मे किये बैठी थी तो मै उसके जङ्हा को चुमने लगा ! उसकी बुर के फ़ांक को सहलाता हुआ अब बुर पर चुम्बन देने लगा, बुर की फ़ांक लम्बी और फ़ुली हुई थी तो बार के रोये बुर पर थे, मै चुमता हुआ उसके स्तन को मसल रहा था और फ़िर बुर को फ़ल्काकर जिभ से चुदवाने लगी, मै तेज गति से उसकी बुर को जिभ से चोद रहा था तो वो मेरे बाल सहलाते हुए….. “आह्हह ऊह्हह राहुल अब चोदो ना बुर मे खुजली हो रही है. ” मै अब बुर के फ़ांक को चुसने लगा और उसके स्तन को दबा रहा था ! अब दोनो बिस्तर पर दुबारा आये तो माया चित होकर लेट गयी और मै उनसे पुछा…… “माया घर मे मख्खन है की नही

(माया) है रेफ़्रिजिरटेर मे देखो. ” मै मख्खन लेकर आया तो माया बेड़ पर चित लेटी हुई थी ! अब माया को पट लेटने को बोला और उसके नितम्ब पर मख्खन रगड़्ने लगा, उसके गोल गुम्बदाकार गांड़ के दरार मे मख्खन रगड़्ते हुए मस्त था ! अब माया चाचि कुतिया बन गयी और मै उनके गांड़ के मुहाने पर मख्खन रगड़ने लगा, अब मै माया की गांड़ के दरार मे जिभ फ़ेरने लगा और मुहाने को पल भर तक चाटा !

माया के गांड़ मे लंड़ पेलता हुआ उसके कमर को थाम रखा था, आधा लंड़ तो आसानी से माया की मांसल गांड़ मे घुस गया और फ़िर मै जोर का धक्का गांड़ मे दे दिया ! मेरा मुसल लंड़ उसकी गांड़ मे था और वो चिंख पड़ी…… “ऊह्हह राहुल जरा आराम से गांड़ चोदो

(राहुल) क्यो साली फ़ट रही है क्या. ” मेरा लंड़ गांड़ के अंदर तेज गति से दौड़ लगा रहा था, फ़िल्हाल तो गांड़ के भितर मख्खन का भी असर था, माया पिछे की ओर मुड़ी और अपने चुत्तर को आगे पिछे करने लगी ! मेरा लंड़ गांड़ की चुदाई करके मस्त था, उसके सिने से झुलते चुचि को मसलता हुआ मजे ले रहा था ! कुछ देर बाद गांड़ की गर्मी चरम पर थी तो मै लंड़ को बाहर किया, फ़िर बुर मे लंड़ पेलकर चुदाई करने लगा, माया जैसी औरत के लिये 10-12 इंच लम्बा और 4-5 इंच मोटा लंड़ की जरुरत थी तभी ऐसी चुदककड़ औरत की बुर त्रिप्त हो सकती है ! मै माया की बुर को चोदता हुआ हांफ़ने लगा और वो ‘ आह्ह ऊम्मम राहुल और तेज चोदो ना बुर से पानी फ़ेंकने पर है. ‘ बोलते हुए अपने चुत्तर को आगे पिछे कर रही थी ! कुछ देर बाद बुर से रस निकला तो मै लंड़ को बाहर किया और माया रानी चित लेट गयी, अब उनकी बुर फ़ल्काए मै जिभ को अंदर पेलकर रस चाटने लगा, फ़िर वो बाथरूम चली गयी ! वापस आने के बाद वो फ़िर से कुत्तिया बन गयी तो मै उसके चुत्तर के सामने से लंड़ को गांड़ मे पेला और तेज गति से गांड़ चोदने लगा, वो अपने चुत्तर को आगे पिछे करने लगी तो मै उसके सिने से झुलते चुचि को मसल रहा था ! 5-7 मिनट के बाद मेरा लंड़ आग की भटटी मे जल रहा था तो वो बोल रही थी…. “ऊह्हह आह्हह्ह राहुल अब झाड़ो ना विर्य गांड़ की आग बुझा दो. ” मै दे दनादन लंड़ पेल रहा था और फ़िर चिंखा…… “आह्ह ये लो बे रंड़ी गांड़ की आग बुझा लो. ” उसके गांड़ की आग बुझाकर मै शांत पड़ गया !

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Linga11

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